गीता गोपीनाथ अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की मुख्य अर्थशास्त्री नियुक्त

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भारत की प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ को अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में मुख्य अर्थशास्त्री के पद पर नियुक्त किया गया है। गीता गोपीनाथ ने आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री का पदभार संभालने वाली पहली महिला हैं। गीता गोपीनाथ आईएमएफ की 11वीं मुख्य अर्थशास्त्री हैं। उन्होंने मौरिस ओस्फेल्ड की जगह ली है, जिनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2018 को समाप्त हो गया है।

गीता गोपीनाथ आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री का पद संभालने वाली दूसरी भारतीय हैं। इससे पहले इस पद पर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन रह चुके हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के लिए नीतियों को तैयार करने और रणनीतियों को निर्धारित करने और विभिन्न देशों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में मदद करने के अतिरिक्त वह विश्व आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट का काम देखेंगी जिसे वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख सर्वेक्षण माना जाता है।

गीता गोपीनाथ भारत के मैसूर शहर में वर्ष 1971 में हुआ था। वे फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क की सलाहकार भी रह चुकी हैं। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें भगवती पुरस्कार, वाशिंगटन विश्वविद्यालय से विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार भी दिया गया। वह वर्तमान में केरल के मुख्यमंत्री की आर्थिक सलाहकार भी हैं। वह भारत के वित्त मंत्रालय के लिए जी-20 मामलों पर प्रतिष्ठित व्यक्ति सलाहकार समूह के सदस्य के रूप में भी कार्य किया है।

गीता गोपीनाथ अर्थशास्त्र से संबंधित कई पुस्तकों का प्रकाशन भी कर चुकी हैं जिसमें उन्होंने विनिमय दरों, व्यापार और निवेश, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संकट, मौद्रिक नीति और उभरते बाजारों के संकट पर 40 अनुसंधान लेख प्रकाशित कर चुकी हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ):

ब्रेटन वुड्स सम्मेलन के निर्णयानुसार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की औपचारिक स्थापना 27 दिसंबर, 1945 को सयुंक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन शहर में हुई थी, लेकिन इसने वास्तविक रूप से 01 मार्च, 1947 से कार्य करना प्रारंभ किया।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का मुख्यालय वाशिंगटन डी.सी. संयुक्त राज्य अमेरिका में है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के वर्तमान में 189 सदस्य हैं। नौरू गणराज्य अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का सदस्य बनने  वाला आखिरी (189वाँ) देश है। भारत अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के संस्थापक सदस्यों में से एक है, यह 27 दिसंबर, 1945 को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में शामिल हुआ।