कर मुक्त ग्रेच्युटी की सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया गया

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केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने आयकर अधिनियम, 1961 के सेक्शन 10 (10) (iii) के तहत कर मुक्त ग्रेच्युटी की सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया है। सरकार ने कर मुक्त ग्रेच्युटी की सीमा को दोगुना करके 20 लाख रुपये कर दिया है, इससे सरकारी तथा प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को लाभ होगा।

ग्रेच्युटी एक किस्म का मौद्रिक लाभ है जो रोज़गार प्रदाता (एम्प्लायर) द्वारा कर्मचारी को प्रदान किया जाता है। ग्रेच्युटी का लाभ प्राप्त करने के लिए एक संगठन में न्यूनतम पांच वर्ष की सेवा अनिवार्य है। ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के अनुसार प्रत्येक रोज़गार प्रदाता द्वारा कर्मचारी को काम छोड़ने पर ग्रेच्युटी देना अनिवार्य है, हालांकि इसके लिए कुछ एक शर्तें पूरी होनी चाहिए।

जिस संगठन में 12 माह तक 10 या इससे अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं, वह संगठन ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के दायरे में आता है। इस अधिनियम के अनुसार यदि एक बार कोई संगठन ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के दायरे में आ जाता है तो वह संगठन सदैव इस अधिनियम के दायरे में रहेगा भले ही कर्मचारियों की संख्या कम हो कर 10 से भी कम हो जाये।