ओडिशा की कंधामल हल्दी को जीआई टैग प्राप्त

0
109

हाल ही में ओडिशा की विशेष महत्व रखने वाली कंधामल हल्दी को जीआई टैग प्रदान कर दिया गया है। ओडिशा के कंधामल की लगभग 15 फीसदी आबादी इसी हल्दी की खेती करती है तथा हल्दी कंधामल की एक विशेष पहचान भी है। अब इसे जीआई टैग प्राप्त हो जाने से इसे विश्व व्यापार में एक स्वतंत्र स्थान मिलेगा। भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम की धारा 13 की उपधारा 1 के तहत मंजूरी प्रदान की गई है।

कंधामल हल्दी अपनी एक अलग विशेषता रखती है। यह हल्दी स्वास्थ्य हेतु बहुत लाभदायक होती है। यह हल्दी कंधामल के जनजातीय लोगों की नकदी फसल होती है। कंधामल हल्दी का प्रयोग सौंदर्य उत्पादों से लेकर औषधियों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस हल्दी के उत्पादन में किसान किसी भी प्रकार का कोई रसायन या कीटनाशक नहीं डालते हैं।

यह हल्दी कंधामल के स्थानीय लोगों द्वारा प्राकृतिक तरीके उत्पादन किया जाता है। इस हल्दी को स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि शासन तंत्र भी कंधामल हल्दी को स्वतंत्रता का प्रतीक यानी अपनी उपज मानता है।

जीआई टैग:

जीआई टैग अर्थात भौगोलिक चिन्ह किसी भी उत्पाद के लिए जारी किया गया एक चिन्ह होता है जो उस उत्पाद की विशेषता, भौगोलिब उत्पत्ति, विशेष गुणवत्ता तथा महत्वपूर्ण पहचान के लिए जाना जाता है। यह चिन्ह सिर्फ उत्पाद के भौगोलिक उत्पत्ति या उत्पत्ति के आधार पर प्रदान किया जाता है। जीआई टैग एक ऐसा नाम है जो किसी भी उत्पाद की विशेषता और गुणवत्ता को दर्शाता है।

कंधामल हल्दी के अलावा जीआई टैग के उदाहरण के रूप में बिहार की शाही लीची, उत्तर कन्नड़ में उत्पादित सिरसी सुपारी, दार्जिलिंग चाय, महाबालेश्वर स्ट्रोबैरी, जयपुर की ब्लूपोटेरी, बनारसी साड़ी, इडुक्की जिले की मरयूर गुड़, बिहार के सिलाव खाजा  तथा तिरूपति के लड्डू इत्यादि शामिल हैं।