इसरो ने सबसे वजनी सैटेलाईट जीसैट-11 का सफल प्रक्षेपण किया गया

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05 दिसंबर 2018 को भारत के सबसे वजनी जीसैट-11 का प्रातः फ्रेंच गुयाना से एरियन स्पेस रॉकेट की मदद से इसरो ने सफल प्रक्षेपण किया। जीसैट-11 का सफल प्रक्षेपण देश में ब्रॉडबैंड सेवा को और बेतहर बनाने में मदद करेगा।

इस संचार उपग्रह को यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के रॉकेट एरियन-5 (Arianए-5) से लॉन्च किया गया। GSAT-11 इसरो के उच्च प्रवाह क्षमता वाले संचार उपग्रह (HTS) समूह का हिस्सा है। उल्लेखनीय है कि इस श्रेणी के दो संचार उपग्रह GSAT-29 और GSAT-19 पहले से ही अंतरिक्ष में हैं। यह ISRO द्वारा निर्मित 34वाँ संचार उपग्रह है।

लाभ:

देश भर में ब्रॉडबैंड सेवाएँ उपलब्ध कराने में GSAT एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह स्पॉट बीम तकनीक के उपयोग के कारण क्षेत्र में ब्रॉडबैंड की क्षमता में वृद्धि करेगा और इंटरनेट डाटा की उच्च दर सुनिश्चित करेगा। GSAT-11 भारत नेट परियोजना जो डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा है, के अंतर्गत आने वाले देश के ग्रामीण क्षेत्रों और दुर्गम ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा।

उल्लेखनीय है कि भारत नेट परियोजना का उद्देश्य अन्य योजनाओं के साथ-साथ ई-बैंकिंग, ई-हेल्थ तथा ई-गवर्नेंस जैसी सार्वजनिक कल्याण की योजनाओं को बढ़ावा देना है।

स्पॉट बीम:

स्पॉट बीम एक सैटेलाइट सिग्नल है जो किसी क्षेत्र विशेष में अधिक आवृत्ति की तरंगे तेजी से भेज सकता है। यह एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र तक ही सीमित होता है। ये बीम जितनी पतली होती हैं उनके सिग्नल उतने ही ज़्यादा शक्तिशाली होते हैं। GSAT-11 में स्पॉट बीम की प्रक्रिया को कई बार दोहराया जाएगा ताकि पूरे देश को कवर किया जा सके। इसके विपरीत इनसैट (INSAT) जैसे पारंपरिक उपग्रह लाइट ब्रॉड सिंगल बीम का प्रयोग करते हैं जो इतने शक्तिशाली नहीं होते कि पूरे देश को कवर कर सकें।