इसरो ने परमाणु घड़ी विकसित की

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक परमाणु घड़ी विकसित की है जिसका इस्तेमाल नैविगेशन सैटलाइट्स में किया जा सकता है ताकि सटीक लोकेशन डेटा मिल सके। वर्तमान में इसरो को अपने नैविगेशन सैटलाइट्स के लिए यूरोपियन ऐरोस्पेस मैन्युफैक्चरर ऐस्ट्रियम से परमाणु घड़ी खरीदनी पड़ती है।

इस घड़ी को स्पेस ऐप्लिकेशन सेंटर (SAC) ने विकसित किया है और अभी इसे परीक्षण के लिए रखा गया है। सारे परीक्षण पास करने के बाद यह देशी परमाणु घड़ी नैविगेशन सैटलाइट्स में भी प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल की सकती है ताकि पता लग सके कि अंतरिक्ष में यह कब तक टिक सकती है और कितना सटीक डेटा उपलब्‍ध करवा सकती है।

इस देसी परमाणु घड़ी के निर्माण के साथ ही इसरो उन चुनिंदा अंतरिक्ष संगठनों में शामिल हो गया है जिनके पास यह बेहद जटिल तकनीक है। यह देसी घड़ी हमारे डिजाइन और स्पेसफिकेशन के अनुरूप पर बनाई गई है। यह घड़ी भी आयात की जाने वाली घड़ियों सी ही काम करती है।

ध्‍यान देने योग्‍य है कि यदि परमाणु घड़ी में कोई खामियां आती है, और अन्य घड़ियों के बीच की गई समय अंतर सटीक नहीं है, तो वो बदले में ऑब्जेक्ट की गलत स्थिति प्रदान करता है। परमाणु घड़ियों के अलावा एक नेविगेशन उपग्रह में क्रिस्टल घड़ियों भी होते हैं लेकिन वे परमाणु घड़ियों के रूप में सटीक नहीं हैं। इसलिए, अगर सैटेलाइट की तीन एटॉमिक घड़ी एरर दिखाती है, तो हमे नई एटॉमिक घडी के साथ बैक उप सैटेलाइट लॉन्च करनी होगी।