आलोक वर्मा सीबीआई के निदेशक से हटाकर फायर सर्विस विभाग के डीजी नियुक्त किये गये

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10 जनवरी 2019 को केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा की पुनः नियुक्ति के कुछ घंटे बाद ही पद से हटना पडा। आलोक वर्मा को केन्द्रीय सतर्कता आयोग द्वारा जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोपों को चलते एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा पद से हटा दिया गया है तथा उन्हें फायर सर्विस विभाग का डीजी नियुक्त किया गया है। यह पद केन्द्रीय गृह मंत्रालय के आधीन कार्य करता है।

आलोक वर्मा के स्थान पर एम. नागेश्वर राव को दोबारा सीबीआई का अंतरिम निदेशक का पद सौंप दिया गया है। राव तब तक सीबीआई के अंतरिम निदेशक के पद पर रहेंगे जब तक कोई नये निदेशक की नियुक्त नहीं कर दी जाती है। ज्ञात हो कि आलोक वर्मा को केन्द्र सरकार द्वारा छुट्टी पर भेजने के बाद नागेश्वर राव को ही सीबीआई की कमान सौंपी गई थी।

दरअसल सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना एक दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करवाया था। जिसके बाद केन्द्र सरकार ने इन दोनों को रात के 2 बजे छुट्टी में भेज दिया था जिसको आलोक वर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।

सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च स्तरीय समिति को आलोक वर्मा को पुनः पद बहाली का निर्देश दिया था जबकि उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा था कि आलोक वर्मा को जल्द ही उनके पद पर बहाल किया था तथा 7 दिन के भीतर उनकें भविष्य को सुनिश्चित किया जाये। जिसके बाद उच्च स्तरीय समिति ने 36 घंटे के अन्दर ही उन्हें सीबीआई के पद से हटाकर फायर सर्विस विभाग का महानिदेशक नियुक्त कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और मुख्य न्यायधीश के प्रतिनिध न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी की समिति ने 2-1 के बहुमत से उन्हें हटाये जाने का फैसला लिया था।

ध्यान देने योग्य है कि सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्त महज दो वर्ष के लिए होती है ताकि किसी भी राजनीतिक दखल से बचाया जा सके। आलोक वर्मा का सीबीआई के निदेशक के रूप में भी कार्यकाल महज कुछ दिन शेष 31 जनवरी 2019 तक था।