आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा

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07 जनवरी 2019 को केन्द्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को (सामान्य वर्ग) सरकारी नौकरियों, शिक्षण संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने की घोषणा की है। केन्द्र सरकार इस घोषणा को कानून में बदलने के लिए जल्द ही लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी। आरक्षण देने का उद्देश्य केंद्र और राज्य में शिक्षा के क्षेत्र, सरकारी नौकरियों, चुनाव और कल्याणकारी योजनाओं में हर वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।

केन्द्र सरकार इस संबंध मं आर्थिक रूप से कमजोर, गरीब वर्ग को संवैधानिक संशोधन विधेयक 2018 को लोकसभा में प्रस्तुत करेगी। इस विधेयक के माध्यम से संविधान की धारा 15 व 16 को संशोधित किया जायेगा। ध्यान देने योग्य है कि आर्थिक रूप से पिछड़ा उन्हीं लोगों जायेगा जिनकी, 

  • परिवार की आय आठ लाख रुपए सालाना से कम हो
  • जिनकी कृषि योग्य भूमि पाँच एकड़ से कम हो
  • आवासीय घर एक हजार वर्ग फीट से कम हो
  • अधिसूचित नगरपालिका में 100 गज़ से कम का प्लॉट हो
  • गैर अधिसूचित नगरपालिका इलाके में आवासीय प्लॉट की सीमा 200 गज़ हो।

संविधान का अनुच्छेद 15 और 16:

अनुच्छेद 15 सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है। अनुच्छेद 15 (1) के अनुसार, राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई अंतर नहीं करेगा। अनुच्छेद 15 (4) और 15 (5) में सामाजिक तथा शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों या अनुसूचित जाति और जनजाति के लिये विशेष उपबंध की व्यवस्था की गई है। लेकिन यहां कहीं भी आर्थिक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसीलिये सवर्णों को आरक्षण देने के लिये सरकार को इस अनुच्छेद में आर्थिक रूप से कमज़ोर शब्द जोड़ने के लिये संविधान संशोधन की ज़रूरत पड़ेगी।

अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरियों और सेवाओं में समान अवसर प्रदान करने की बात करता है। लेकिन 16(4) 16(4)(क), 16(4)(ख) तथा अनुच्छेद 16(5) में राज्य को अधिकार दिया गया है कि वह पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण दे सकता है। यहाँ भी आर्थिक शब्द का जिक्र कहीं नहीं है। इसलिये सरकार को गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के लिये संविधान के इन दो अनुच्छेदों में संशोधन करना होगा।

आरक्षण की वर्तमान स्थितिः

भारत में आरक्षण की व्यवस्था केन्द्र और राज्य में सरकारी नौकरियों, कल्याणकारी योजनाओं, चुनाव व शिक्षा के क्षेत्र में हर वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने हेतु की गई है। जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आने का मौका मिल सके। इस समय भारत में कुल 49.5 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जा रहा है। जिसमें अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछ़डा वर्ग (ओबीसी) में बांटा गया है।

  • अनुसूचित जातिः  15%
  • अनुसूचित जनजाति : 7.5%
  • अन्य पिछड़ा वर्ग : 27%