आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर भारत-जापान की संयुक्त कार्यशाला आयोजित

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नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने 19 मार्च, 2018 को दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत और जापान द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) पर आयोजित पहली कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन संयुक्‍त रूप से गृह मंत्रालय, राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और जापान सरकार द्वारा किया जा रहा है।

यह कार्यशाला 2017 में भारत-जापान के बीच हस्ताक्षर किये गए सहयोग समझौते का परिणाम है जिसका उद्देश्य DRR में सहयोग के क्षेत्रों पर एक विशिष्ट द्विपक्षीय कार्य योजना का विकास करना है।

कार्यशाला में आपदा जोखिम कम करने खासकर भूकंपों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। इस अवसर पर डॉ. राजीव ने छह पक्षीय दृष्टिकोण – जोखिम की पहचान, जोखिम कम करना, तैयारी, वित्‍तीय सुरक्षा, अस्‍थायी पुनर्निर्माण और सामाजिक जागरूकता के जरिए आपदा जोखिम न्‍यूनीकरण पर चर्चा की। उन्‍होंने विनाशकारी प्राकृ‍तिक आपदाओं से निपटने के लिए नागरिकों को तैयार करने में शिक्षा और स्‍कूल की भूमिका के बारे में बताया। जोखिम से जुड़े निवेश को बढ़ावा देने के लिए हितधारकों के साथ साझेदारी बढ़ाने की भूमिका पर बल दिया। 

मुख्‍य बिंदू:

  • जापान प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर के तट पर स्थित है और भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील देश है।
  • विनाशकारी भूकंपों के इसके लंबे इतिहास को देखते हुए, जापान में समुदायिक जागरूकता का स्तर बेहद उच्च है।
  • इसका प्रौद्योगिकीय ज्ञान, विशेष रूप से, भूकंप जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में दुनिया के सर्वाधिक उन्नत देशों में से एक है।
  • भारत में तेज़ी से शहरीकरण हो रहा है और अवसंरचना क्षेत्र में व्यापक निवेश तय है। चूँकि भारत के भू-भाग का लगभग 59% मध्यम से बेहद तीव्र आवेग वाले भूकंपों के प्रति संवेदनशील है, यह न केवल किसी भूकंप की स्थिति में मानव जीवन को बचाएगा बल्कि आर्थिक रूप से भी यह लाभदायक है।
  • यह कार्यशाला ऐसे खोज करने का अवसर भी प्रस्तुत करेगी कि किस प्रकार जापान अपनी अवसंरचना को वर्तमान एवं भविष्य के आपदा जोखिमों से निपटने के अनुकूल बनाए रखने में निवेश करता है।