असम सरकार ने एन.आर.सी. का अंतिम मसौदा जारी किया

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असम सरकार द्वारा कड़ी सुरक्षा के बीच असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के दूसरे व अंतिम मसौदा को जारी कर दिया गया है। इसे इसलिये जारी किया गया है ताकि असम में अवैध तौर पर रह रहे लोगों का पता लगाया जा सके।

केंद्र सरकार ने भी असम और आसपास के राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों की 220 कंपनियां भेजी हैं। सीमाओं पर केंद्रीय बलों के अलावा इंडियन रिज़र्व बटालियन (आईआरबी) की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं।

एनआरसी में दर्ज मुख्य तथ्य:

कुल 3.29 करोड़ आवेदन में 2.89 करोड़ लोगों के नाम राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में शामिल किए जाने के योग्य पाए गए जबकि 40 लाख लोगों का नाम ड्राफ्ट में नहीं हैं।

वैध नागरिकता के लिए 3,29,91,384 लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें 40,07,707 लोगों को अवैध माना गया।

रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेश द्वारा जारी बयान में कहा गया कि 2,89,83,607 लोगों को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में योग्य पाकर उन्हें शामिल किया गया है। सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया कि जिन लोगों के नाम इस ड्राफ्ट में शामिल नहीं हैं उनके अधिकार कम नहीं होंगे।

आवेदकों के लिए एक टोल फ्री नंबर भी जारी किया है जिस पर फोन करके भी पता लगाया जा सकता है, कि उन्हें भारतीय नागरिकता मिली है या नहीं। यह ड्राफ्ट 30 जुलाई को प्रकाशित किया गया है।

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी):

यह असम के नागरिकों की नागरिकता सूची है। इसमें उन सभी भारतीय नागरिकों के नाम, पते और फोटोग्राफ हैं,  जो 25 मार्च, 1971 से पहले से असम में रह रहे हैं। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में यह आश्वासन भी दिया गया है कि जो लोग वैध नागरिक नहीं पाए गए हैं, उन्हें निर्वासित नहीं किया जाएगा।

आवश्यकता क्यों?

असम में लंबे समय से अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों का मुद्दा छाया रहा है। 80 के दशक में इसे लेकर छात्रों ने आंदोलन किया था, जिसके बाद असम गण परिषद और तत्कालीन राजीव गांधी सरकार के बीच समझौता हुआ। इसमें कहा गया है कि वर्ष 1971 तक जो भी बांग्लादेशी असम में घुसे उन्हें नागरिकता दी जाएगी और बाकी को निर्वासित किया जाएगा। वर्ष 1951 में एनआरसी तैयार किया गया था तब से इसे सात बार जारी करने की कोशिशें हुईं। आख़िरकार, वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह सूची जारी हुई है।