अमेरिकी वैज्ञानिकों ने आकाशगंगा में नए तारामंडल की खोज की

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नासा के एक शोधकर्ता बेंजमिन पोप के अनुसार नासा के वैज्ञानिकों ने मिल्की वे आकाशगंगा में नए और विशाल तारामंडल की उपस्थिति का पता लगाया। यह तारामंडल सुपरनोवा स्थिति में पाया गया। यह तारामंडल उन मौजूदा सिद्धान्तों को चुनौती देता है कि बडे और सबसे पुराने सितारों को अस्तित्व अन्ततः कैसे खत्म हो जाता है।

नासा के वैज्ञानिकों ने जिस सुपरनोवा तारामंडल का पता लगाया है वह गामा रे बर्स्ट प्रोजेनिटर सिस्टम है। इस सुपरनोवा तारामंडल से प्लाज्मा की सबसे शक्तिवर्धक, शक्तिशाली और सकरी धारा निकलती है। वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि ऐसी क्रिया केवल दूर स्थित आकाशगंगा में ही होती है।

इस तारामंडल का नाम एपेप’ (Apep) नाम दिया गया है। इसकी जानकारी नेचर एस्ट्रोनॉमी पत्रिका में प्रकाशित की गई है।

तारामंडल की खोज मिशन में कई संस्थाओं और विश्वद्यालयों के शोधकर्ता शामिल थे, जिनमे नीदरलैंड इंस्टीट्यूट  फॉररेडियो एस्ट्रोनॉमी, द यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी, यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग, यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के वैज्ञानिक शामिल थे।

वैज्ञानिकों की खोज के अनुसार यह तारामंडल पृथ्वी से 8000 प्रकाश वर्ष दूर होता है। बताया गया कि यह आकाशगंगा में सुपरनोवा में स्थित एपेप एक धूल भरा गुब्बार है।

सुपरनोवा:

सुपरनोवा खगोलशास्त्र के अनुसार किसी तारे या सितारे की मृत्यु के समय होने वाला भयंकर विस्फोट सुपरनोवा कहलाता है। इसका विस्फोट इतना भयंकर होता है कि इसके आस-पास की पूरी आकाशगंगा को धुंधला कर देता है। इसके विस्फोट से इतना प्रकाश और विकरण निकलता है कि पूरी आकाशगंगा को धूमिल कर देता है।