अमेरिका ने ईरान परमाणु समझौते से अलग होने की घोषणा की

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 08 मई 2018 को ईरान के साथ हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते से अमेरिका के अलग होने की घोषणा की। ओबामा के समय के इस समझौते की ट्रंप पहले ही कई बार आलोचना कर चुके हैं।

ईरान परमाणु समझौता तेहरान और छह वैश्विक शक्तियों के बीच वर्ष 2015 में हुआ था। छह वैश्विक शक्तियों में अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और ईरान शामिल हैं। इस समझौते के बाद ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को रोक दिया था, जिसके बदले में अमरीका ने ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी थी। समझौते के मुताबिक ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना था और अपने परमाणु संयंत्रों को निगरानी के लिए खोलना था, बदले में उसपर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में आंशिक रियायत दी गई थी।

ईरान के साथ परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में से अमेरिका को छोड़कर बाकी सभी देश चाहते हैं कि ईरान के साथ तीन साल पहले हुआ अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौता बना रहे। लेकिन अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि ईरान परमाणु समझौते का गलत इस्तेमाल कर रहा है। ईरान उसे मिल रही परमाणु सामग्री का इस्तेमाल हथियार बनाने में कर रहा है। परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल का निर्माण कर रहा है। इसलिए अमेरिका ने इस समझौते से अलग होने का निर्णय लिया है।

परमाणु समझौते से अमेरिका के अलग होने से ईरान पर दोबारा आर्थिक प्रतिबंध लग सकते हैं जिससे वैश्विक तेल कंपनियों पर ईरान से तेल नहीं खरीदने का दबाव बढ़ेगा। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी और पश्चिमी एशिया में तनाव बढे़गा।